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कछू यहूदियन ईसू क नुकताचीनी किहेन

(मत्ती 12:1-8; लूका 6:1-5)

23 अइसा भवा कि ईसू सबित क दिन अनाजे क खेतन्से होत भवा जात रहा। अउर ओकर चेलन संग संग जात रहेन। ओकर चेलन जात जात अनाजे क बलिया खाइ बरे नोचेन। 24 फरीसियन देखेन अउर ईसू स कहेन, “देखा सबित क दिन ओ पचे काहे अइसा करत अहइँ। अइसा करब इ दिन क व्यवस्था क माफिक नाहीं।”

25 एह पइ ईसू ओनसे कहेस, “तू सबइ दाऊद[a] क बारे मँ पढ़या ह कि उ का करेस ह। जब उ अउर ओकर साथी संगी क भूख लाग अउर ओनका खइया क जरूरत भइ? 26 का तू पढ्या नाहीं कि जब अबियातार एक महायाजक रहा, तब दाऊद कइसे परमेस्सर क मन्दिर मँ गवा अउर चढ़वा मँ चढ़ी रोटी खाएस जउन परमेस्सर क चढ़ाई गइ रही। जउन मूसा क व्यवस्था क माफिक कउनो क बरे नाहीं मुला याजकन क खाइ क बरे रहीं। दाऊद सबन्क कछू रोटिन्क दिहस जउन ओकरे संग रहेन?”

27 ईसू ओनसे कहेस, “सबित क दिन मनई बरे बनवा ग रहा, मुला मनई सबित क दिन बरे नाहीं। 28 एह बरे मनई क पूत सबित क पर्भू भी।”

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Footnotes

  1. 2:25 दाऊद इस्राएल क राजा, मसीह क 1,000 बरिस पहिले।

Jesus Is Lord of the Sabbath(A)(B)

23 One Sabbath Jesus was going through the grainfields, and as his disciples walked along, they began to pick some heads of grain.(C) 24 The Pharisees said to him, “Look, why are they doing what is unlawful on the Sabbath?”(D)

25 He answered, “Have you never read what David did when he and his companions were hungry and in need? 26 In the days of Abiathar the high priest,(E) he entered the house of God and ate the consecrated bread, which is lawful only for priests to eat.(F) And he also gave some to his companions.”(G)

27 Then he said to them, “The Sabbath was made for man,(H) not man for the Sabbath.(I) 28 So the Son of Man(J) is Lord even of the Sabbath.”

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